शनिवार, 22 मार्च 2014

राष्ट्र निर्माण

राष्ट्र निर्माण एक विशेष उपलब्धि है । और यह हरेक के वश की बात नहीं । यह वही कर सकता है जिसमें सबको साथ लेकर चलने की अद्भुत क्षमता हो । क्योंकि यह बात भी सही है कि यह अकेले दम पर नहीं किया जा सकता । राष्ट्र निर्माण मे समावेशी विकाश के साथ-२ संवृद्धि की बहुत अहम भूमिका होती है जिसके तहत वर्तमान का बेहतर उपयोग करते हुये भविष्य के लिए इसकी पर्याप्त संभाव्यता को भी बरकरार रखना आवश्यक होता है । आजादी के बाद देश मे शीर्षस्तर पर इसतरह के निर्माणकर्ता का अभाव खलता रहा है । क्योंकि सभी के हित निहित स्वार्थ से फलीभूत होते चले गए हैं । और सही(शुद्ध) परिकल्पना के साथ कुछ करने के लिए अगर कोई आगे आये भी होंगे तो उनके सहयोगी ही (तथाकथित) बाधक सिद्ध हुये हैं । आगे सिर्फ-और-सिर्फ उम्मीद ही लगा सकते हैं कि आने वाले भविष्य में शीर्षस्तर पर देश को एक बेहतर निर्माणकर्ता का नेतृत्व प्रदान हो सके । .......एक उम्मीद के साथ भविष्य की ओर उन्मुख .............. !

सकारात्मक राजनीति

सकारात्मक्ता एक महत्वपूर्ण पहलू है जिससे करीब सभी सहमत हो सकते हैं । बस जरूरत है तो इसे आत्मसात करने की । खासकर भारतीय राजनीति के संदर्भ मे देखा जाय तो यह बहुत ही जरूरी है । ध्यान जाता है चुनाव की तरफ जिसमें चुनावी राजनीति सिर्फ-और-सिर्फ सत्ता के लिये ही नहीं होती है बल्कि यह जनता को मुद्दों से अवगत कराते हुये उसे शिक्षित और जागरूक करने मे भी सहायक होती है । जिसके तहत राजनीतिक पार्टियों ,नेताओं ,विभिन्न सामाजिक संगठनों तथा व्यक्तियों के द्वारा इसके विभिन्न पहलुओं और आयामों से देश की जनता को अवगत कराया जाता है । और यदि यह सकारात्मक्ता के साथ हो तो देश के विकास के लिये यह बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकता है ।